संघर्ष से सफलता तक: रामगढ़ उकरीद की अनारकली कुमारी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
संघर्ष से सफलता तक: रामगढ़ उकरीद की अनारकली कुमारी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
संघर्ष से सफलता तक: रामगढ़ उकरीद की अनारकली कुमारी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

संघर्ष से स्वावलंबन तक अनारकली कुमारी की सफलता की कहानी*
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रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखण्ड के अंतर्गत उकरीद गाँव की रहने वाली अनारकली कुमारी (पति बिजय राम) का जीवन कभी अभावों और आर्थिक तंगहाली के साये में बीतता था। पाँच सदस्यों के परिवार की जिम्मेदारी उनके पति बिजय राम के कंधों पर थी, जो खेती-बारी और एक छोटी सी दुकान के जरिए मुश्किल छह हजार रुपये प्रति माह कमा पाते थे। इतने कम पैसों में बच्चों की परवरिश और घर की जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती थी। सबसे बड़ी समस्या तब आती थी जब किसी आकस्मिक जरूरत के लिए पैसों की आवश्यकता होती थी। गाँव के महाजनों से कर्ज लेना किसी दलदल में फंसने जैसा था, जहाँ ऊँची दर से ब्याज वसूला जाता था। कर्ज चुकाना नामुमकिन सा लगता था और भविष्य धुंधला नजर आता था। ऐसे में गरीबी से बाहर निकलने के लिए हमेसा अनारकली कुमारी के मन में खुद का व्यवसाय करने की इच्छा थी।

अंधेरे भरे इन दिनों में वर्ष 2021 में बदलाव की एक किरण उकरीद गाँव पहुँची। (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के माध्यम से एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना था। तीन CRP दीदियों और गाँव की सक्रिय महिलाओं ने पाँच दिनों तक गाँव में रहकर महिलाओं को एकजुट किया। इसी दौरान अनारकली कुमारी “वीणा महिला विकास संघ” समूह से जुड़ीं। यहाँ उन्हें न केवल समूह के नियमों और बुक कीपिंग का प्रशिक्षण मिला, बल्कि कम ब्याज दर (मात्र 1 रुपये प्रति सैकड़ा) पर ऋण लेने की सुविधा, बैंक लिंकेज, RF (चक्रीय निधि) और CIF (सामुदायिक निवेश कोष ) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
अनारकली के अन्दर का आत्मविश्वास जाग उठा। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति बदलने के लिए साहस दिखाया और समूह के माध्यम से प्राप्त वित्तीय सहायता बैंक लिंकेज से कुल 60,000 रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि से उन्होंने अपने गाँव में एक “सिंगर स्टोर और सिलाई केंद्र” की शुरुआत की। जहाँ पहले वे केवल दूसरों पर निर्भर थी, अब वे खुद एक उद्यमी बन चुकी थीं। सिलाई मशीन की घरघराहट के साथ उनकी किस्मत के पन्ने भी पलटने लगे। सिलाई और स्टोर के काम से न केवल उनकी आमदनी बढ़ी, बल्कि गाँव में उनकी एक नई पहचान “उद्यमी दीदी” के रूप में स्थापित हुई।
आज अनारकली कुमारी की मेहनत रंग ला रही है। वर्तमान में, सिलाई सेंटर से 4000 रुपये और जनरल स्टोर से प्रतिमाह 8000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। अब उनकी वार्षिक 150000 तक की हो जाती है। अब इनके परिवार में पैसों की किल्लत कम हो गई है बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल रही है और घर का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से हो रहा है। अनारकली गर्व से कहती हैं कि आज उनका परिवार उन पर नाज करता है। JSLPS के सहयोग ने उन्हें महाजनों के चंगुल से निकालकर आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा कर दिया है।
सफलता की इस सीढ़ी पर चढ़ने के बाद अनारकली के सपने अब और भी बड़े हो गए हैं। वे भविष्य में अपने जनरल स्टोर को एक बड़े व्यवसाय में तब्दील करना चाहती हैं ताकि वे और अधिक लोगों को सेवाएँ दे सकें। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें एक सम्मानजनक नौकरी करते हुए देखना है।