कुड़मालि भाषा को अधिकार दिलाने संसद में गरजे गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी
कुड़मालि भाषा को अधिकार दिलाने संसद में गरजे गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी
गिरिडीह के सांसद Chandra Prakash Choudhary ने लोकसभा में कुड़मालि भाषा को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए जोरदार और संवेदनशील तरीके से मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक भाषा का मामला नहीं, बल्कि लाखों लोगों की पहचान, अस्मिता और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
सांसद ने अपने वक्तव्य में बताया कि कुड़मालि भाषा झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रहने वाले कुड़मी समाज के लाखों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोकगीतों और लोककथाओं की समृद्ध धरोहर है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी संजोया गया है।
उन्होंने कहा कि जब किसी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाता है, तो उसे केवल औपचारिक मान्यता नहीं मिलती, बल्कि उसके संरक्षण, विकास और विस्तार के नए अवसर खुलते हैं। इससे शिक्षा, प्रशासन और प्रतियोगी परीक्षाओं में उस भाषा को स्थान मिलता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
सांसद ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि कुड़मालि भाषा को जल्द से जल्द आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए और इसे आधिकारिक भाषा कोड भी प्रदान किया जाए, ताकि इसे वह सम्मान मिल सके जिसकी यह पूरी तरह हकदार है।
उन्होंने यह भी कहा कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब देश की हर भाषा को समान सम्मान और अधिकार दिया जाएगा। कुड़मालि भाषा बोलने वाले लोग लंबे समय से अपनी पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
सांसद ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर सकारात्मक कदम उठाएगी और जल्द ही कुड़मालि भाषा को उसका उचित स्थान मिलेगा।
Conclusion:
कुड़मालि भाषा को लेकर उठी यह आवाज अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है, जो लाखों लोगों की पहचान और सम्मान
