झारखंड में बढ़ती समस्याओं पर फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
झारखंड में बढ़ती समस्याओं पर फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
झारखंड में बढ़ती समस्याओं पर फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

आपकी विकास पार्टी” के केंद्रीय अध्यक्ष गुलाम मुस्तफा ने झारखंड राज्य की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर महामहिम राज्यपाल महोदय को लोक भवन, रांची में एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा।
प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के गठन को लगभग 26 वर्ष हो चुके हैं, बावजूद इसके राज्य में मूलभूत समस्याओं का समुचित समाधान अब तक नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारें बनने के बावजूद आम जनता को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
पार्टी द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
1.राज्य में पलायन रोकने के लिए रोजगार सृजन किया जाए तथा 1932 खतियान आधारित नियोजन नीति लागू की जाए।
2.सरकार द्वारा चुनाव के दौरान किए गए वादों के अनुसार उर्दू भाषा, मदरसा बोर्ड एवं उर्दू अकादमी से संबंधित घोषणाओं को अविलंब पूरा किया जाए।
3.कोडरमा जिले के अभ्रख उद्योग को मेजर से माइनर (लघु उद्योग) में शामिल किया जाए तथा जिले के सभी उद्योगों में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
4.JTET 2026 परीक्षा में उर्दू, मगही एवं भोजपुरी भाषाओं को शामिल किया जाए। इन भाषाओं को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है, जिससे अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त है।
5.बोकारो जिले के पांडराजोरी थाना कांड संख्या 147/2025 (दिनांक 04/08/2025) में कुमारी पुष्पा महतो हत्याकांड की निष्पक्ष जांच CBI या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए तथा पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
6.हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ प्रखंड को अनुमंडल का दर्जा दिया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं मिल सकें।
7.रामगढ़ जिले के चितरपुर प्रखंड में एक आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की जाए, जिससे लगभग 80 हजार की आबादी को चिकित्सा सुविधा मिल सके।
8.चितरपुर के बड़की पोना रेलवे स्टेशन के पास रोड ओवरब्रिज का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
गुलाम मुस्तफा ने कहा कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो “आपकी विकास पार्टी” झारखंड राज्य में व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
अंत में उन्होंने महामहिम राज्यपाल महोदय से मांग पत्र पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान करने का अनुरोध किया, ताकि झारखंड के मूल निवासियों को उनका हक, अधिकार और सम्मान मिल सके।