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चाईबासा “नो एंट्री” विवाद गरमाया—74 लोगों पर केस वापस लेने की मांग

चाईबासा “नो एंट्री” विवाद गरमाया—74 लोगों पर केस वापस लेने की मांग


चाईबासा “नो एंट्री 2025” विवाद: 74 लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग तेज

रांची/चाईबासा:

झारखंड के चाईबासा क्षेत्र में “नो एंट्री 2025” को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस मामले में दर्ज 74 लोगों पर मुकदमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग उठाई है। साथ ही MDR-177 (चाईबासा बाईपास), NH-75E और NH-220 पर भारी वाहनों के दिन के समय प्रवेश पर सख्ती से “नो एंट्री” लागू करने की भी मांग की गई है।

बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार राज्य के परिवहन मंत्री और स्थानीय विधायक से संवाद स्थापित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इससे लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, मजदूर, किसान और आम नागरिक इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि 25 अक्टूबर 2025 को शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 74 नामजद और 500 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर दिया। साथ ही कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिससे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है।

 

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:

 

 

“नो एंट्री 2025” मामले में दर्ज सभी मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं

 

 

MDR-177, NH-75E और NH-220 पर दिन में पूर्ण रूप से नो एंट्री लागू हो

 

 

सड़क दुर्घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो

 

 

मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए

 

 

अवैध खनन और ओवरलोडिंग ट्रांसपोर्टिंग पर रोक लगे

 

 

 

निष्कर्ष:

क्षेत्र के लोगों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है, ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आम जनता को राहत मिले। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा

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