रांची यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर बवाल—आदिवासी छात्र संघ का बड़ा खुलासा!
रांची यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर बवाल—आदिवासी छात्र संघ का बड़ा खुलासा!
आदिवासी छात्र संघ, झारखंड

विषय: रांची विश्वविद्यालय में विवादास्पद कुलपति की नियुक्ति, क्लस्टर सिस्टम और पदों के पुनर्गठन की विसंगतियों के विरुद्ध प्रेस वार्ता।
स्थान: जैकब हॉल, DSPMU, रांची।
दिनांक: 11 जून 2026
समय: दोपहर 12:00 बजे
रांची: आज दिनांक 11 जून 2026 को रांची के जेकब हॉल में ‘आदिवासी छात्र संघ’ द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय (RU) में कुलपति की नियुक्ति और संकल्प संख्या 902 के तहत शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन (Restructuring) से उत्पन्न गंभीर संकटों पर मीडिया के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु और संवैधानिक चुनौतियां:
1. दागी कुलपति की नियुक्ति और एट्रोसिटी एक्ट का उल्लंघन:
आदिवासी छात्र संघ प्रोफेसर सरोज शर्मा की कुलपति पद पर नियुक्ति का पुरजोर विरोध करता है। उन पर NIOS की चेयरपर्सन रहते हुए एक दलित कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने और जातीय अपमान करने का गंभीर आरोप है, जिसके तहत दिल्ली पुलिस ने FIR (863/2024) दर्ज की है।
संवैधानिक पक्ष: ऐसी नियुक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Atrocities Act) की भावना के विरुद्ध है। एक ऐसे व्यक्ति को संस्थान का प्रमुख बनाना, जिस पर अनुसूचित जाति/जनजाति के उत्पीड़न का आरोप हो, झारखंड के आदिवासी-मूलवासी छात्रों की गरिमा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आघात है।
2. संकल्प संख्या 902 और क्लस्टर सिस्टम (Clustering) का विरोध:
सरकार द्वारा जारी संकल्प संख्या 902 के तहत ‘क्लस्टरिंग ऑफ कॉलेजेस’ (Clustering of Colleges) की नीति लागू की जा रही है, जो ग्रामीण और आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा के अवसरों को सीमित करती है।
विसंगतियां: क्लस्टर सिस्टम के नाम पर विषयों को विशिष्ट महाविद्यालयों में केंद्रित किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, रांची के 5 प्रमुख कॉलेजों को एक क्लस्टर बनाकर विषयों का बंटवारा कर दिया गया है। इससे छात्रों को अपने पसंदीदा विषय की पढ़ाई के लिए एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज भटकना पड़ेगा, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद होगा।
आरक्षण का हनन: पदों के युक्तिकरण (Rationalization) और सरेंडर (Surrender) की प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी की जा रही है। संघ का मानना है कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत प्रदत्त शैक्षणिक और रोजगार आरक्षण के अधिकारों का उल्लंघन है।
3. स्थानीयता और छात्र हित की अनदेखी:
कार्यकारी अध्यक्ष दया राम ने स्पष्ट किया कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में ‘बाहरी’ और ‘दागी’ चेहरों के बजाय स्थानीय विद्वानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पदों का पुनर्गठन छात्रों की वर्तमान संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं के बजाय केवल पदों को समाप्त करने की मंशा से प्रेरित है।
आदिवासी छात्र संघ की प्रमुख मांगें:
1 माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति से आग्रह है कि प्रोफेसर सरोज शर्मा की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और किसी स्वच्छ छवि वाले स्थानीय विद्वान को कुलपति नियुक्त किया जाए।
2 क्लस्टर सिस्टम (Cluster System) को अविलंब रद्द किया जाए, ताकि छात्रों को उनके अपने कॉलेज में ही सभी विषयों की शिक्षा मिल सके।
3 संकल्प संख्या 902 के तहत पदों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और आरक्षण रोस्टर का पूर्ण पालन करते हुए रिक्त पदों पर पारदर्शी नियुक्ति शुरू की जाए।
4 एससी/एसटी एट्रोसिटी एक्ट के तहत आरोपी व्यक्ति को शैक्षणिक संस्थान के शीर्ष पद से दूर रखा जाए।
इस अवसर पर केंद्रीय समिति के अध्यक्ष अमृत मुंडा, कार्यकारी अध्यक्ष दया राम, अखिलेश पाहन, अरविंद टोप्पो, अमृत टोप्पो, राकेश रोशन, अभिषेक रजक सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
निवेदक रांची विश्व विद्यालय रांची , आदिवासी छात्र संघ, झारखंड।
