विधायक जयराम कुमार महतो की आलोचना करने से पुलिस प्रशासन को पहले अपना व्यवहार सुधारना चाहिए।
विधायक जयराम कुमार महतो की आलोचना करने से पुलिस प्रशासन को पहले अपना व्यवहार सुधारना चाहिए।
विधायक जयराम कुमार महतो की आलोचना करने से पुलिस प्रशासन को पहले अपना व्यवहार सुधारना चाहिए।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) अध्यक्ष और विधायक जयराम कुमार महतो का बरवाअड्डा थाना प्रभारी को गाली देना निस्संदेह उचित और सभ्य तरीका नही कहा जा सकता है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उनसे शिष्टाचार और संयम की अपेक्षा जरुर की जानी चाहिए। लेकिन इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन और कुछ लोगों द्वारा जो हंगामा खड़ा किया जा रहा है, वह एकतरफा और दोहरे मानदंड वाला है।
यहाँ सवाल यह है कि पुलिस विभाग के सिपाही,हवलदार,जमादार, सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर,डीएसपी, एसपी और उससे ऊपर के अधिकारी आम जनता खासकर आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ क्या व्यवहार करते हैं? धौंस, धमकी, गाली-गलौज, बेवजह की मारपीट और झूठी रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज करवाने की शिकायतें बार-बार सामने आती रहती हैं। जब विधायक की एक गाली से दर्द होता है, तो वही भाषा और रवैया जब हजारों आम नागरिकों के साथ अपनाया जाता है, तब चुप्पी क्यों ?
पुलिस प्रशासन को विधायक जयराम कुमार महतो पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। सबसे पहले जनता से बात करने का तरीका बदलना होगा। भाषा में सुधार लाना होगा। शक्ति का अहंकार छोड़कर सेवा और संवेदनशीलता का भाव अपनाना होगा। अगर अधिकारी और जवान आम आदमी से भी वैसी ही गरिमा और शिष्टाचार से बात करेंगे जैसी वे उच्च अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों से करते हैं तो गाली-गलौज की घटनाएं खुद कम हो जाएंगी।
आज एक विधायक बोल रहा है। कल आम नागरिक भी पुलिस से इसी लहजे में बात करने लगेंगे—यह चेतावनी नही, बल्कि व्यवस्था की नाकामी का संकेत है। जब व्यवस्था खुद अभद्रता और दबाव का सहारा लेती है, तो प्रतिक्रिया भी वैसी ही निकलती है।
इसलिए पुलिस प्रशासन को जयराम कुमार महतो की गाली पर तौबा-मचाते रहने के बजाय आत्मनिरीक्षण और आत्म मूल्यांकन करना चाहिए। जनता के साथ व्यवहार में सुधार हो, तो सम्मान स्वतः बढ़ेगा। सभ्यता एकतरफा नहीं चलती। पहले खुद सुधारें, फिर दूसरों से अपेक्षा करें।
लक्ष्मीनारायण मुंडा
रांची।